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अरुण जेटली का वादा, जीएसटी (GST) दरें ‘हैरान’ करने वाली नहीं होंगी

May 03, 2017

GST के लिए कल विधानसभा सत्र

हरियाणा की बीजेपी सरकार ने जीएसटी बिल को पारित करवाने के लिए विधानसभा सत्र से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सत्र 4 मई को बुलाया गया है। इसका मुख्य फोकस हालांकि जीएसटी बिल रहेगा लेकिन, इस दौरान पांच अन्य संशोधन बिल भी पेश किए जाएंगे। सत्र दोपहर 2 बजे से शुरू होगा। कोई प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। शोक प्रस्तावों के तुरंत बाद जीएसटी बिल पेश हो जाएगा।

इस दौरान विपक्ष जीएसटी पर अपने सुझावों के साथ-साथ खामियों और शंकाओं को लेकर सरकार की घेराबंदी भी करता हुआ नजर आ सकता है। विपक्षी दलों की गतिविधियों पर गौर करें तो इस दौरान सत्र की अवधि बढ़ाए जाने की मांग भी उठ सकती है। यहां क्लिक करें

GST तो ठीक, लेकिन इंस्पेक्टरराज ठीक नहीं

व्यापारियों ने कहा, फॉर्म भरवाने के लिए सेंटर बनाया जाए. एनबीटी, लखनऊ : कैबिनेट में गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) बिल पास होने को लेकर व्यापारियों की मिली-जुली प्रक्रिया है। ज्यादातर ने जीएसटी से नहीं बल्कि उसके प्रारूप पर आपत्ति जताई है। व्यापारियों के अनुसार जीएसटी में मामूली गलती पर भी जेल भेजने का प्रावधान है। इससे इंस्पेक्टरराज कायम होगा और व्यापारियों का शोषण किया जाएगा। जीएसटी को लेकर शहर के व्यापारियों ने अपने-अपने विचार रखे।

अब भी बहुत व्यापारी इंटनेट का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में लोगों को जानकारी देने के लिए कैम्प लगवाए जाने चाहिए। इसके साथ ही इंस्पेक्टर राज भी ठीक नहीं है। यहां क्लिक करें

GST में टैक्स रेट 25-30% कम होगा, 1 जुलाई से लागू करने की तैयारी : रेवेन्यू सेक्रेटरी

रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अढिया ने कहा है कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने से कंज्यूमर को वस्तुओं पर टैक्स में 25-30% तक राहत मिल सकती है। अभी केंद्र-राज्य के अलग-अलग टैक्स हैं, जीएसटी में एक टैक्स होने से राहत मिलेगी। भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कई राज्य 1 जुलाई से इसे लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, कश्मीर में 18-19 मई को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद यह चर्चा अपने आप खत्म हो जाएगी कि राज्य साथ नहीं है। सालाना 20 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाले कारोबारी के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है। ऐसे में कोई कारोबारी दो कंपनी बनाकर इससे बचना चाहे तो क्या होगा? यहां क्लिक करें

बढ़ सकती है GST रजिस्ट्रेशन की तारीख, अभी तक 64 फीसदी कारोबारी ही जुड़े

गुड्स और सर्विस टैक्स (जीएसटी) में कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन की तारीख आगे बढ़ सकती है। अभी तक के उपलब्ध डाटा के अनुसार, जीएसटी पोर्टल पर देश के 64 फीसदी कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाने की वजह से सरकार ऐसा करने पर विचार कर रही है। कारोबारियों के अनुसार जीएसटी रजिस्ट्रेशन पोर्टल में कई सारी समस्याएं हैं जिसकी वजह से वह रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए। यहां क्लिक करें

जीएसटी : बार-बार पैन मिस मैच होने का मिल रहा संदेश

वाणिज्यिक कर विभाग में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) माइग्रेशन के लिए वेट पंजीयन में शीघ्र संशोधन की कार्यवाही की जा रही है। वैट संशोधन न होने के कारण व्यापारियों को जीएसटी माइग्रेशन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वैट पंजीयन में त्रुटि को ठीक करवाने के लिए ऑनलाइन संशोधन आवेदन देने पर विभाग के अधिकारियों की ओर से साक्ष्य मांगे जा रहे हैं, जबकि व्यापारियों की ओर से साक्ष्य पूर्व में ही ऑनलाइन संशोधन आवेदन के साथ अपलोड किए जा चुके हैं। इस समस्या से निजात के लिए हाल ही में एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन ने वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त राघवेन्द्र सिंह को ज्ञापन भी सौंपा है। यहां क्लिक करें

अरुण जेटली का वादा, जीएसटी (GST) दरें ‘हैरान’ करने वाली नहीं होंगी

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वादा किया कि नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में कर की दरें तय करते समय किसी तरह का हैरान करने वाला फैसला नहीं लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि कर दरें मौजूदा स्तर से ‘उल्लेखनीय रूप से अलग’ नहीं होंगी.

हालांकि, वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनियों को जीएसटी के तहत करों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को स्थानांतरित करना चाहिए. जीएसटी से केंद्रीय और राज्य शुल्कों का मौजूदा प्रभाव समाप्त हो सकेगा. यहां क्लिक करें

अरुण जेटली ने कहा की GST टैक्स मैजूदा नियम से ज्यादा अलग नहीं होगा

वित्त मंत्री अरुण जेटली इस का अश्वासन दिया था कि नई वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी नियम में कर की दर सुनिश्चित करते समय ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाएगा जिससे किसी को कोई परेशानी हो। उन्होंने ये भी कहा था कि कर दरें मौजूदा नियम से ज्यादा अलग नहीं होंगी। लकिन जेटली ने ये कहा कि कंपनियों को जीएसटी के तहत करों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को स्थानांतरित करना चाहिए। क्योंकि जीएसटी से केंद्रीय और राज्य शुल्कों का जो मौजूदा प्रभाव खत्मम हो सकेगा। यहां क्लिक करें

गहनों के मेकिंग चार्ज पर GST का होगा विरोध

जूलरी और बुलियन बाजारों में इन दिनों हर कोई जीएसटी की नई दरों को लेकर पसोपेश में है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि जहां सरकार सोने की बिक्री पर 2 से 4 पर्सेंट तक जीएसटी लगा सकती है, वहीं गहनों की बनवाई को सर्विस मानते हुए इस पर 18 पर्सेंट तक टैक्स लगाया जा सकता है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन छोटे जूलरों को हो सकता है, जो सोना खरीदकर गहने बनवाते हैं। जूलर्स का का कहना है कि ऐसा हुआ तो इंडस्ट्री में एक्साइज विरोध से भी बड़ा आंदोलन हो सकता है। यहां क्लिक करें

अब तक केवल 34% सर्विस टैक्सपेयर ही जुड़े GST से, CBEC पहुंच बढ़ाएगा

राजस्व विभाग ने करदाताओं से इस माह के अंत तक वस्तु एवं सेवाकर (GST) प्रणाली से जुड़ने के लिए कहा है क्योंकि मौजूदा सेवाकरदाताओं में से केवल 34 प्रतिशत ही अब तक इस नयी कर प्रणाली के साथ जुड़े हैं. ज्यादा लोगों को इससे जोड़ने के लिए विभाग अपने पहुंच कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है.

मौजूदा समय में कुल 80 लाख मूल्य वर्धित कर (वैट), उत्पाद एवं सेवाकरदाता हैं. अभी वैट करदाताओं में से 75 प्रतिशत और केंद्रीय उत्पाद शुल्क दाताओं में से 73 प्रतिशत लोगों ने जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में अपना पंजीकरण करा लिया है लेकिन सेवाकर दाताओं में से केवल 34 प्रतिशत ही इस प्रणाली से जुड़े हैं. जीएसटीएन नयी कर व्यवस्था में कर भुगतान का माध्यम होगी. यहां क्लिक करें

GST लागू होने से पहले कहीं हो न जाए सामान की किल्लत

जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स 1 जुलाई से लागू होना है, लेकिन इससे पहले खुदरा व्यापारियों में आशंका का माहौल है। छोटे रिटेलर्स और होलसेल में सामान बेचने वालों ने कंपनियों से सामान की खरीदी कम कर दी है। इन्हें आशंका है कि 1 जुलाई तक सामान नहीं बिका तो नया टैक्स लागू हो जाएगा और उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा। माना जा रहा है कि ऐसा ही चला तो बाजार में जरूरी चीजों की कमी आ सकती है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये छोटे रिटेलर्स और होलसेलर्स अभी खरीदे जा रहे सामान पर वेल्यू-एडेड टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और अन्य चार्ज दे रहे हैं। यहां क्लिक करें

GST में मत समझिए कि सिर्फ ‘फूल ही फूल हैं, इसमें कांटे भी कम नहीं’

जुलाई में एक देश, एक बाजार अब हकीकत बनने वाला है यानी कि गुड्स एंड सॢवस टैक्स (जी.एस.टी.) लागू होने वाला है। बस यह समझिए कि शादी की सारी तैयारियां हो चुकी हैं, सिर्फ  जयमाला की देर है।

तमाम जरूरी कानून को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है। रेट के स्लैब भी तय हो गए हैं लेकिन 5000 आइटम में किस पर जी.एस.टी. की क्या दरें होंगी, बस यही तय होना बाकी है। उम्मीद है कि 18-19 मई को श्रीनगर में जब जी.एस.टी. काऊंसिल की बैठक होगी तो दरों पर फैसला हो जाएगा लेकिन यह मत समझिए कि जी.एस.टी. में फूल ही फूल हैं, कांटे नहीं। यहां क्लिक करें

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