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वस्तु एवं सेवाकर (GST) : 1 जुलाई से लागू होने वाले इस टैक्स से जुड़े हर सवाल का जवाब

May 15, 2017

वस्तु एवं सेवाकर (GST) : 1 जुलाई से लागू होने वाले इस टैक्स से जुड़े हर सवाल का जवाब

जीएसटी (GST) भारत सरकार की नई प्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जोकि 1 जुलाई 2017 से लागू हो रही है. जीएसटी का पूरा नाम गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) है. यह केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए गए 20 से अधिक अप्रत्यक्ष करों के एवज में लगाया जा रहा है. जीएसटी 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाना है. जीएसटी लगने के बाद कई सेवाओं और वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स समाप्त हो जाएंगे.

किन्हीं वस्तुओं के उत्पादन से लेकर उसके उपभोक्ता के हाथों में पहुंचने के बीच कई प्रकार के टैक्स अब तक लगते रहे हैं. इस एक टैक्स के लगने से ये अलग अलग तरह के टैक्स समाप्त हो जाएंगे या यूं कहें कि किसी वस्तु या सेवा के आपके हाथों तक पहुंचने में लगने वाले विभिन्न प्रकार के कर अब इस कर के भीतर ही समो लिए जाएंगे. यहां क्लिक करें

1 जुलाई से ही लागू होगा GST : अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी 1 जुलाई से लागू होना तय है. इससे वस्तुओं के दाम में कोई महत्त्वपूर्ण वृद्धि नहीं होगी. भारत की आजादी के बाद जीएसटी को सबसे बड़ा कर सुधार बताते हुए जेटली ने कहा कि जीएसटी से राज्य और केंद्र के स्तर पर लगने वाले करों के स्थान पर एक राष्ट्रीय बिक्री कर लगेगा.

जापान की राजधानी टोक्यो में सीआईआई-कोटक निवेशक गोलमेज सम्मेलन में बोलते हुए जेटली ने कहा कि उनकी अध्यक्षता और हर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाली जीएसटी परिषद अगले कुछ दिनों में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के लिए कर की दर को अंतिम स्वरुप प्रदान कर देगी. जेटली ने कहा कि देश एक जुलाई से अप्रत्यक्ष करों को आसान बनाने के सही रास्ते पर है. यहां क्लिक करें

लघु व मध्यम उद्यमियों ने की सरकार से जीएसटी रिटर्न के नियम बदलने की मांग

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) एक जुलाई, 2017 से लागू करने की कोशिश कर रही सरकार अब इसके नियमों को अंतिम रूप देने में जुट गई है।

जीएसटी की नियम संबंधी समिति की इस हफ्ते बैठक हो रही है। इसमें रिटर्न और रिफंड से लेकर वस्तु एवं सेवा कर के लिए जरूरी सभी नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

हालांकि लघु व मध्यम उद्यमियों ने जीएसटी के रिटर्न संबंधी में नियमों में बदलाव की मांग की है। यहां क्लिक करें

GST में इनपुट क्रेडिट का एसएमई पर कैसा होगा प्रभाव

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अर्थव्यवस्था के लिए भारी उलटफेर करने वाला है। नई कर व्यवस्था में सरल टैक्स अनुपालन, टैक्स पर टैक्स की समाप्ति, अंतर्राज्यीय कारोबार में सहजता, कीमतों में कटौती और कर आधार में भारी वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। इसके टेक्नोलॉजी संचालित होने के कारण ज्यादा पारदर्शिता आएगी।

इन्वॉयस मैचिंग से जीएसटी न केवल कर प्रणाली में एक बड़ाबदलाव साबित होगा, बल्कि इससे कारोबार करने के तरीके भी बेहतर होंगे। इसमें संभावनाओं के बावजूद नियम- कानूनों के मौजूदा प्रारूप में परेशानी खड़ी करने वाली बातें भी हैं। खासकर छोटे और मझोले उद्यम (एसएमई) इनके शिकार होंगे। यहां क्लिक करें

छोटे कारोबारियों के लिए कई सौगात लाएगा GST

पहली जुलाई से लागू होने जा रही नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली जीएसटी जहां छोटे ट्रेडर्स के लिए कुछ नई चुनौतियां लेकर आ रही है, वहीं उन्हें कई नई रियायतें और कारोबारी मौके भी मुहैया कराएगी। इनमें से कई चीजें कारोबारियों को मौजूदा वैट, एक्साइज या सर्विस टैक्स में हासिल नहीं हो पातीं। जानकारों का कहना है कि वैसे तो 20 लाख रुपये टर्नओवर तक ट्रेडर जीएसटी से मुक्त होंगे, लेकिन इसके दायरे में आने के बाद भी 1.5 करोड़ रुपये टर्नओवर तक उन्हें कई रियायतें मिलेंगी। यहां तक कि टैक्स चुकाने और रिटर्न भरने के लिए भी उनकी विशेष मदद का प्रावधान है। यहां क्लिक करें

GST की आहट से डीलरों पर मंडरा रहा ये खतरा

जी.एस.टी. लागू होने से पहले डीलरों ने विनिर्माताओं से माल उठाना कम कर दिया है क्योंकि उन्हें पुराने स्टाक पर चुकाए गए कर के बदले छूट (टैक्स क्रेडिट) मिलने को लेकर अशंका है। इससे उत्पाद शुल्क संग्रहण पर बुरा असर पड़ा है।

गौरतलब है कि जी.एस.टी. एक जुलाई से लागू किए जाने की संभावना है। माल एवं सेवा कर (जी.एस.टी) परिषद कर की दरें तय करने के लिए 18-19 मई को बैठक करेगी। सूत्रों के अनुसार 6000 प्रकार के उत्पादों के सिलसिले में दरें तय की जानी है। चुकाए गए कर को लेकर अनिश्चितता तथा जी.एस.टी. के शुरू होने से पहले इस मामले में कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं होने से डीलर सामान खरीदने और स्टाक जमा करने के बजाय अभी इंतजार करना ही उचित मान रहे हैं। यहां क्लिक करें

स्टांप और कॉइन कलेक्ट करने वालों को GST की टेंशन

स्टांप कलेक्ट करने का शौक रखने वालों ने फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि उनकी इस हॉबी को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के तहत 28 पर्सेंट टैक्स के सबसे ऊंचे स्लैब में न रखा जाए। इन लोगों को डर है कि स्टांप, कॉइंस, पेंटिंग्स और एंटीक आइटम्स जैसी संग्रहणीय चीजों को ‘अनक्लासिफाइड गुड्स’ माना जा सकता है और इस तरह इस पर सबसे ज्यादा जीएसटी रेट लगाया जा सकता है।

ऑल इंडिया फिलेटलिस्ट्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ बोथरा ने कहा, ‘हमें पता है कि सरकार और फाइनेंस मिनिस्टर को जीएसटी से बहुत उम्मीद है, लेकिन ऐसा टैक्स स्टांप और कॉइन कलेक्टर्स को बड़ा धक्का पहुंचाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘खासतौर से ज्यादा वैल्यू के स्टांप्स के मामले में सभी लोग ट्रांसपैरेंट प्रोसेस को पसंद करते हैं और ऐसे लोगों को जीएसटी के तहत ज्यादा टैक्स देना पड़ जाएगा।’ यहां क्लिक करें

र‌िटर्न फाइल करते हैं तो पढ़ें यह खबर, होने वाला है बड़ा फायदा

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के लागू होने के बाद व्यापारियों और उद्यमियों को रिटर्न फाइल करने के लिए पेपर वर्क के झंझट से छुटकारा मिलेगा। टैक्स जमा करवाने के लिए कोई फार्म या अन्य कागजी काम नहीं होगा। जीएसटी में सारे काम पेपर लेस होंगे। अब ऑनलाइन सिस्टम से ही कारोबारियों को हर महीने रिटर्न जमा करनी होगी। अभी तक वैट प्रणाली में तिमाही रिटर्न जमा करना पड़ता है। एक जुलाई से जीएसटी प्रणाली लागू होने की पूरी संभावना है। यहां क्लिक करें

स्पेशल GST रेट के इंतजार में हैं कई बाजार

वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) दरों के 4 स्लैबों की घोषणा होने के बाद से ही ज्यादातर ट्रेडर्स ने अपने टैक्स रेट का अंदाजा लगा लिया है, लेकिन 1 से 2 पर्सैंट वैट के दायरे में आने वाली कुछ आइटमों के लिए एक ‘स्पैशल रेट’ अभी तय होना है। इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है और व्यापार पर भी असर हो रहा है। साथ ही एक ही तरह की कई आइटमों, जिन पर अलग-अलग वैट लगता है, लेकिन जी.एस.टी. दरों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। यहां क्लिक करें

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