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GST से क्या होगा सस्ता और क्या महंगा

Jun 05, 2017

GST से क्या होगा सस्ता और क्या महंगा

भारत में नया गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई से लागू होना है. गुरुवार को कई वस्तुओं और सेवाओं के लिए टैक्स दरें तय कर दी गईं.

जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन 1200 से ज़्यादा वस्तुओं-सेवाओं के लिए टैक्स दरें तय की गईं. अलग-अलग टैक्स श्रेणियां बनाई गई हैं जो 5 से 28 फ़ीसदी के बीच हैं.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने श्रीनगर में पत्रकारों को बताया, ‘1211 आइटम्स में 6 श्रेणियों को छोड़कर बाक़ी की जीएसटी दरें तय हो गई हैं.’ यहां क्लिक करें

GST में 1211 सामानों पर लगेगा टैक्‍स, देखें पूरी लिस्‍ट

वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अन्तर्गत 1211 वस्तुओं पर टैक्स तय कर लिया गया है. GST लागू होने के  बाद इनमें से अधिकतर वस्तुओं के बाजार मूल्य में कमी की उम्मीद है. इसकी वजह यह है कि इन वस्तुओं पर लगने वाला प्रस्तावित टैक्स वर्तमान टैक्स से कम है.

GST काउंसिल ने 9 में से 7 नियमों को मंजूरी दी है. बाकी 2 नियमों पर लीगल कमेटी फैसला करेगी. जीएसटी काउंसिल ने टैक्स स्लैब के मुताबिक जो सामान तय किए हैं, उनमें ज्यादातर सामानों पर 5 से लेकर 18 फीसदी टैक्स लगेगा.

बड़ी बात ये है कि अनाज को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है. केवल 19 फीसदी चीजें ही ऐसी होंगी जो 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आएंगी. यहां क्लिक करें

जीएसटी: जानिए किस सामान पर लगेगा कितना टैक्‍स और कौन होगा टैक्स फ्री!

वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के अन्तर्गत 1211 वस्तुओं पर टैक्स तय कर लिया गया है. जीएसटी लागू होने के बाद इनमें से अधिकतर वस्तुओं के बाजार मूल्य में कमी की उम्मीद है. इसकी वजह यह है कि इन वस्तुओं पर लगने वाला प्रस्तावित टैक्स वर्तमान टैक्स से कम है.

जीएसटी काउंसिल ने 9 में से 7 नियमों को मंजूरी दी है. बाकी 2 नियमों पर लीगल कमेटी फैसला करेगी. जीएसटी काउंसिल ने टैक्स स्लैब के मुताबिक जो सामान तय किए हैं, उनमें ज्यादातर सामानों पर 5 से लेकर 18 फीसदी टैक्स लगेगा.

बड़ी बात ये है कि अनाज को टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है. केवल 19 फीसदी चीजें ही ऐसी होंगी जो 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आएंगी. यहां क्लिक करें

सोने से लेकर फुटवियर तक के GST तय, ‘सूती’ को राहत ‘बीड़ी’ पर बोझ, पूरे स्लैब की लिस्ट

देश में वस्तु और सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को एक जुलाई से लागू करने की दिशा में शनिवार को एक और बड़ी पहल हुई है. जीएसटी परिषद ने सोने पर तीन प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का फैसला कर दिया है. आम जनता के उपयोग वाले 500 रुपये तक के चप्पल-जूते पर पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया जाएगा जबकि बिस्कुट को 18 प्रतिशत जीएसटी की श्रेणी में रखा गया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 15वीं बैठक में सोना, चप्पल-जूते, बिस्कुट के अलावा धागे, कृषि मशीनरी, परिधान और बिना तराशे हीरों सहित कुछ अन्य वस्तुओं के लिए भी जीएसटी दरें तय की गईं. यहां क्लिक करें

GST: गोल्ड पर 3%, बीड़ी पर सबसे ज्यादा 28% टैक्स लगेगा; फुटवियर होंगे सस्ते

जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को गोल्ड, बिस्किट, बीड़ी, टेक्सटाइल्स, फुटवियर और एग्रीकल्चर मशीन पर टैक्स स्लैब तय कर दिए। मीटिंग के बाद अरुण जेटली ने बताया कि गोल्ड पर 3% टैक्स लगेगा। आज जिन चीजों के रेट तय किए गए, उनमें बीड़ी पर सबसे ज्यादा 28% टैक्स रखा गया है। इसके अलावा 500 रुपए से कम के फुटवियर पर 5% टैक्स लगेगा। सभी राज्य 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने पर राजी हो गए हैं। जीएसटी काउंसिल की पिछली मीटिंग भी श्रीनगर में ही हुई थी। उसमें 1200 से ज्‍यादा गुड्स और 500 से ज्यादा सर्विसेज पर टैक्‍स रेट तय हुआ था। जानिए किस पर, कितना टैक्स… यहां क्लिक करें

‘GST : जूलरी की कीमतें बढ़ेंगी’

सोने-चांदी की बिक्री पर 3 पर्सेंट जीएसटी रेट भले ही जूलरी सेक्टर की मांग से थोड़ा ज्यादा हो, लेकिन पिछले कुछ समय से जारी अटकलों के मुकाबले जूलर्स राहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, बेसिक इम्पोर्ट ड्यूटी कायम रहने, स्टॉक ट्रांसफर पर टैक्स और मेकिंग चार्ज पर 18 पर्सेंट जीएसटी को लेकर वे नाराज दिख रहे हैं।

ऑल इंडिया जेम्स एंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन के पूर्व चेयरमैन बच्छराज बमालवा ने कहा, ‘रेट न कम न ज्यादा है, लेकिन जैसी अटकलें चल रही थीं उसके मुकाबले नरम कहा जा सकता है। फिर भी जूलरी की कीमतें बढ़नी तय है, जिसका बोझ ग्राहक पर ही पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने जूलर्स की कुछ दिक्कतों को समझा है। उनका लेबर खर्च अब वैल्यू में शामिल हो सकेगा। यहां क्लिक करें

एक जुलाई से सभी इंश्‍योरेंस प्रीमियम के साथ बैकिंग सर्विस भी हो जाएगी और महंगी

एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के साथ ही लाइफ, हेल्‍थ और जनरल इंश्‍योरेंस के साथ ही बैंकिंग सर्विसेज भी आपके लिए महंगी हो जाएंगी. जीएसटी के कारण फाइनेंशियल सर्विसेज पर सर्विस चार्ज 15 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी होने जा रहा है. चूंकि इन मामलों में इनपुट टैक्‍स क्रेडिट की पूरी तस्‍वीर साफ नहीं है, ऐसे में इन सेवाओं का महंगा होना लगभग तय माना जा रहा है. वैसे भी पिछले दिनों एसबीआई समेत अधिकांश बैंकों ने कैश विद्ड्रॉल समेत सभी तरह की सर्विस पर चार्जेंज बढ़ा दिए हैं. इस तरह आप पर दोहरी मार पड़ने जा रही है. यहां क्लिक करें

GST से और संगठित लॉजिस्टिक सेक्टर आएगा सामने : ICRA

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने शुक्रवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था आने से वस्तुओं के प्रवाह में आपूर्ति श्रृंखला समय में कमी आने से सुधार आने की संभावना है क्योंकि वैट से जुड़ी चौकियां हट जाएंगी. इस एजेंसी ने कहा कि कहा कि जीएसटी का क्रियान्वयन सड़क लॉजिस्टिक क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम है. जीएसटी के पश्चात अधिक कुशल एवं संगठित लॉजिस्टिक क्षेत्र के धीरे धीरे उभरने की संभावना है.

उसने कहा, ‘‘जिस तरह देश में वस्तुओं की ढुलाई और उनका भंडारण होता है, उन पर जीएसटी व्यवस्था का महत्वपूर्ण असर होने की संभावना है. ’’ उसने कहा कि लॉजिस्टिक क्षेत्र पर जीएसटी के तीन बड़े परिणाम होंगे. पहला, भंडारों का एकीकरण और वहां से फिर वस्तुओं की विभिन्न दिशाओं में आपूर्ति, दूसरा, अधिक कर अनुपालन तथा तीसरा एक्सप्रेस एवं पारंपरिक ढुलाई सेवाओं के लिए समान अवसर पैदा करना है. यहां क्लिक करें

क्या जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने में आ सकती हैं दिक्कतें? यह पढ़िए

एक जुलाई से देशभर में जीएसटी लागू किया जाना है. पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था को एक जुलाई से लागू करने में ‘गंभीर समस्यायें’ आ सकती हैं. ऐसी स्थिति में इसके क्रियान्वयन में एक माह की देरी करने में कोई नुकसान नहीं है.

हालांकि, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विश्वास जताया कि राज्य इस नई कर व्यवस्था को एक जुलाई से लागू करने के लिये तैयार हैं. जेटली ने कहा, ‘मैं तय तिथि को लेकर अडिग हूं’ मित्रा ने जीएसटी क्रियान्वयन में देरी किये जाने की मांग करते हुए कहा, ‘केन्द्र ने यदि एक जुलाई को ही क्रियान्वयन पर जोर दिया तो इसमें गंभीर समस्यायें आ सकती हैं. यहां क्लिक करें

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