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जीएसटी लागू होने के 15 दिन में ही सरकार के आ गए 'अच्छे दिन', आपके आए क्या?

Jul 20, 2017

जीएसटी लागू होने के 15 दिन में ही सरकार के आ गए ‘अच्छे दिन’, आपके आए क्या?

वस्तु एवं सेवाकर बिल यानी जीएसटीको लागू करने के पीछे सरकार की ओर से दावा किया गया है कि इससे ‘अच्छे दिन’ आ जाएंगे. जीएसटी लागू होने के 15 दिन बाद जो आंकड़े आए हैं उससे तो लग रहा है कि कम से कम सरकार के अच्छे दिन आ गए हैं. जीएसटी को लेकर किए जा रहे विरोध पर सरकार का शुरू से ही कहना रहा है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था ‘एक बाजार’ प्रणाली पर आएगी. विकास दर बढ़ेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे.

15 दिन में बढ़ा राजस्व

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद राजस्व में कितनी बढ़ोतरी हुई है, इसकी सटीक जानकारी अक्टूबर से पहले नहीं मिल पाएगी, जब नई अप्रत्यक्ष व्यवस्था अपनी पहली तिमाही पूरी करेगी. लेकिन लागू होने के पहले 15 दिनों के आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि राजस्व में महीने-दर-महीने आधार पर 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यहां क्लिक करें

सैनिटरी नैपकिन पर GST: वित्त मंत्रालय को HC की नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को वित्त मंत्रालय और GST काउंसिल को उस याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें याचिकाकर्ता ने सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी GST लगाने को चुनौती दी है। हाई कोर्ट की ऐक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 15 नवंबर तक इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर जवाब दाखिल करें। साथ ही याचिकाकर्ता से कहा है कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में एक रिप्रजेंटेशन दें। यहां क्लिक करें

खुदरा, वाहन क्षेत्र के लिये GST सकारात्मक, लघु, मध्यम उद्योगों के लिये नकारात्मक: फिच

अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की नई व्यवस्था जीएसटी संभवत: वाहन, सीमेंट और संगठित खुदरा क्षेत्र के लिये फायदेमंद हो सकती है लेकिन तेल एवं गैस और लघु एवं मध्यम उद्योगों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता. यह दावा ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच का है.

इसके विपरीत संपत्ति, बिजली, दूरसंचार, औषधि और उर्वरक क्षेत्र के मामले में जीएसटी का व्यापक तौर पर कोई प्रभाव नहीं होगा. इसमें कहा गया है कि इस राष्ट्रीय सेवाकर का कुछ क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका के बावजूद उसकी कंपनियों को दी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की रेटिंग में किसी भी तरह का बदलाव आने की उम्मीद नहीं है. यहां क्लिक करें

GST परिषद ने सिगरेट पर सेस बढ़ाया, सरकारी खजाने में आएंगे अतिरिक्त 5000 करोड़ रुपये – 10 खास बातें

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने सिगरेट पर सेस (उपकर) बढ़ा दिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि जीएसटी दरें तय होने के बाद विसंगति की वजह से सिगरेट बनाने वाली कंपनियां ‘अप्रत्याशित’ लाभ कमा रही थीं और इसी के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है. हालांकि, सेस में बढ़ोतरी से सिगरेट कीमतों में बदलाव नहीं होगा. यह सेस सोमवार मध्यरात्रि से प्रभावी माना जाएगा. यहां क्लिक करें

GST के बाद सामान की अधिक कीमत वसूली पर टैक्स विभाग की सख्‍ती, उठाए ये कदम

देश में 1 जुलाई से GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू हो चुका है. सरकार आम आदमी तक ज्यादा से ज्यादा जीएसटी के बाद कम हुई सामान की कीमतों का फायदा पहुंचाने के लिए लगातार कदम उठा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्‍स, एफएमसीजी, मोबाइल हैंडसेट कंपनियों और कुछ फूड चेंस को लोकल टैक्स अथॉरिटीज ने नोटिस भेजे हैं. इन कंपनियों से जीएसटी से पहले और बाद के इनवॉइस की डिटेल्स मांगी गई हैं. टैक्स विभाग ने कीमतों पर नजर रखने के लिए ऐसा किया है. यहां क्लिक करें

जीएसटी (GST) लागू होने के बाद कैसे हैं हालात, जीएसटी परिषद आज करेगी समीक्षा

माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को 1 जुलाई से लागू हुए अब तक दो सप्ताह हो गए हैं. इसी के मद्देनजर जीएसटी परिषद की बैठक आज यानी सोमवार को होने जा रही है जिसमें इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के क्रियान्वयन के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी. लागू होने के बाद यह जीएसटी परिषद की पहली बैठक है.

जीएसटी परिषद का गठन पिछले साल सितंबर में हुआ था. उसके बाद से परिषद की यह 19वीं बैठक होगी. अभी तक परिषद की बैठक में केंद्र और राज्य आमने सामने बैठकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते रहे हैं. इस बार यह चर्चा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी. सूत्रों ने बताया कि इस बैठक की तारीख को पहले कर दिया गया है क्योंकि परिषद जीएसटी के लागू होने के बाद स्थिति की समीक्षा करना चाहती है. यहां क्लिक करें

GST नियमों के पालन पर अभी ज्यादा जोर नहीं देंगे टैक्स अधिकारी: CBEC

इनकम टैक्स अथॉरिटीज गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के तहत नियमों के पालन पर पहले छह महीनों में बहुत ज्यादा जोर नहीं देंगी। ऐसा कारोबारियों को नए टैक्स सिस्टम के साथ अच्छी तरह तालमेल बैठाने के लिहाज से किया जाएगा। यह बात सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम्स की चेयरपर्सन वनजा सरना ने कही है।

सरना ने बुधवार को कहा, ‘सीबीईसी के पास एनफोर्समेंट अथॉरिटीज हैं। मैंने साफ तौर पर कहा है कि पहले तीन से छह महीनों में कदम जरा धीमे से बढ़ाएं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं चाहती हूं कि छोटे-मोटे मामले बनाए जाएं।’ यहां क्लिक करें

GST से ऑनलाइन सेलर्स का पेपरवर्क बढ़ा, कारोबार करना हुआ मुश्किल

एक जुलाई से देश भर में लागू हुए GST ने छोटे मर्चेंट्स और उन ई-कॉमर्स कंपनियों की सिरदर्दी बढ़ा दी है, जिनके साथ वो काम करते हैं. GST को आजादी के बाद का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म बताया जा रहा है और इसके साथ ‘वन नेशन, वन टैक्स’ का कॉन्सेप्ट लाया गया है. लेकिन रिटेलर्स को नया टैक्स सिस्टम इतना सिंपल नहीं लग रहा है. उन्हें डॉक्यूमेंट्स संबंधी जरूरतों और प्रॉडक्ट क्लासीफिकेशंस जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जो चार्ज किए जाने वाले टैक्स के पर्सेंटेज पर असर डालता है. यहां क्लिक करें

20 दिन बाद खुला सूरत का कपड़ा मार्केट, GST के आगे झुके कपड़ा व्यापारी

जीएसटी के खिलाफ पिछले 20 दिन तक बंद रहा सूरत का कपड़ा बाजार आखिरकार बुधवार को खुल गया. कपड़ा बाजार के खुलने से इस कारोबार से जुड़े लोगों ने तो राहत की सांस ली है साथ ही साथ खुद केंद्र सरकार ने राहत की सांस ली होगी क्योंकि सूरत के कपड़ा बाजार को शुरू करवाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे थे.

लगातार पिछले 20 दिन तक बंद रहे सूरत के इस कपड़ा बाजार की दुकानें बुधवार को खुलने के साथ ही बाजार में चहल-पहल देखने को मिली. हालांकि सूरत के कपड़ा बाजार की दुकानें पुलिस सुरक्षा में खोली गई है यह बात यहां पुलिस की उपस्थिति साबित कर रही है. यहां क्लिक करें

GST: दुकानदार इन तरीकों से लोगों के साथ फ्रॉड कर रहे हैं, संभल कर रहें

जीएसटी लागू होने के बाद दुकानदार अपने फायदे के लिए लोगों को ठग रहे हैं और इसके लिए वे तरह तरह के तरीके अपना रहे है। जानिए और सावधानी बरतें।

दरअसल, जीएसटी लागू होने के बाद सस्ते होने वाले समान की लिस्ट में अब तक ज्यादातर सामान उन्हीं दामों पर बेचे जा रहे हैं जितने पहले। दालें, दूध, टूथपेस्ट जैसे आइटम के दामों में अब तक कोई परिवर्तन नहीं है। आम पब्लिक ज्यादा सामान परचून की दुकानों से खरीदती है और वहां दामों में कोई अंतर नहीं है। मसलन दालों के दाम पहले भी 70 रुपये किलो थे और अब भी दाल की कीमतें 70 रुपये है। यहां क्लिक करें

GST: सरकार ने कंपनियों से 30 जुलाई तक पंजीकरण कराने को कहा

सरकार ने व्यापारियों से जीएसटी के तहत 30 जुलाई तक पंजीकरण कराने को कहा है। हालांकि जिन व्यापारियों का कारोबार 20 लाख रुपये से कम है या पूरी तरह छूट वाली वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति में लगे हैं, उन्हें नई कर व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं है। जीएसटी 1 जुलाई से लागू हो चुका है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘जीएसटी कानून के तहत व्यापारियों को 30 जुलाई 2017 तक पंजीकरण कराना है। सभी व्यापारियों से अुनरोध है कि वे अंतिम तिथि तक इंतजार किए बिना पंजीकरण कराएं।’ जीएसटी के तहत पंजीकरण के लाभ को बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि मूल्य श्रृंखला में कच्चे माल पर किए गए टैक्स भुगतान का लाभ दिया जा सकता है और टैक्स की राशि सीधे सरकारी खजाने में आएगी। यहां क्लिक करें

GST के असर से आयात-निर्यात में गिरावट, जल्द होगा सुधार: नोमुरा

2017 की दूसरी छमाही में घरेलू मांग में तेजी आने की उम्मीद को देखते हुये साल के दौरान चालू खाते का घाटा बढ़कर 1.3 फीसदी हो जाने का अनुमान है. 2016 में चालू खाता घाटा 0.6 फीसदी था. नोमुरा की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. जापान की इस प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी के मुताबिक जुलाई से जीएसटी लागू होने पर कामकाज में जो अव्यवस्था आई थी उसके सामान्य हो जाने के बाद आयात मांग अपने पुराने स्तर पर पहुंच जायेगी.

नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है, हमारा अनुमान है कि भारत का चालू खाते का घाटा कैड 2017 में बढ़कर 1.3 फीसदी तक पहुंच जायेगा जो कि 2016 में 0.6 फीसदी पर था. यहां क्लिक करे

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